नई शिक्षा नीति बेरोजगारी को दूर करने और गुणात्मक शिक्षा का प्रसार करने के लिए रामबाण साबित होगी। : एके सिंह

नई शिक्षा नीति बेरोजगारी को दूर करने और गुणात्मक शिक्षा का प्रसार करने के लिए रामबाण साबित होगी। : एके सिंह

 

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गुरुवार को डीएवी पब्लिक स्कूल बरही में नई शिक्षा नीति पर ऑनलाइन वेबीनार का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्राचार्य अशोक कुमार सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सभी शिक्षक व शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस परिचर्चा का आयोजन सीबीएसई के द्वारा सभी विद्यालय के प्रधानाचार्य व शिक्षकों से नई शिक्षा नीति पर विशेष तौर पर मांगे गए सुझाव और नई शिक्षा नीति की विशेष जानकारी को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया है। सीबीएसई के द्वारा 12 क्षेत्रों में विशेष तौर पर सुझाव मांगे गए हैं जिसके अंतर्गत नई शिक्षा नीति के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सारे देश का सुझाव मिल सके। जिसके अंतर्गत प्रारंभिक बाल्यकाल देखभाल और शिक्षा अधिगम की बुनियाद, बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान, ड्रॉपआउट दर को कम करना और सभी स्तरों पर शिक्षा की सर्व सुलभ पहुंच सुनिश्चित करना, पाठ्यक्रम मनोरंजक व कारगर कैसे बने, समान और समावेशी शिक्षा सभी के लिए, व्यवसायिक शिक्षा की उपयोगिता को पुनः प्रतिपादित करना साथ ही ऑनलाइन शिक्षा के प्रयोग इत्यादि जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सभी से सुझाव मांगे गए हैं। नई शिक्षा नीति आज के दौर में बेरोजगारी को दूर करने और गुणात्मक शिक्षा का प्रसार करने के लिए रामबाण साबित होगी। उन्होंने कहा कि किसी कारणवश बीच में शिक्षा छोड़ देने वालों के लिए बिना समय बर्बाद किए दोबारा शिक्षित होने का सुनहरा अवसर भी प्रदान करती है। प्राचार्य महोदय ने कहा कि अपने कार्य में प्रोन्नति पाने के लिए भी शिक्षा के द्वार पर कोई भी व्यक्ति किसी उम्र में भी दस्तक दे सकता है। इस वेबीनार में पहले रिसोर्स पर्सन के तौर पर बोलते हुए राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि नई शिक्षा नीति अब 10 +2+3 के स्थान पर 5+3+3+4 के स्तर पर काम करेगी । वेबीनार में उन्होंने बताया कि कक्षा पांचवी तक मातृभाषा में शिक्षा देने पर जोर दिया जाएगा ताकि बच्चों के नैसर्गिक सोच का पूर्णरूपेण विकास संभव हो सके। पांच का मतलब शिशु वाटिका से लेकर कक्षा द्वितीय तक, 3 का मतलब कक्षा तृतीय से लेकर पंचम तक ,अगले 3 का मतलब कक्षा 6 से लेकर अष्टम तक और चार का मतलब कक्षा नवम से लेकर द्वादश तक होगा ।इस वेबीनार में दूसरे रिसोर्स पर्सन के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ शिक्षक आलोक कुमार प्रमाणिक ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों का मूल्यांकन तीन स्तर पर होगा ।पहला बच्चा खुद अपना मूल्यांकन करेगा। दूसरा उसके सहपाठी और तीसरे स्तर पर वर्ग शिक्षक और विषय शिक्षक बच्चों का मूल्यांकन करेंगे। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति बच्चों के अंदर गुणात्मक शिक्षा के विकास के साथ-साथ मनपसंद विषय पढ़ने का भी मौका प्रदान करता है । वेबीनार में तीसरे रिसोर्स पर्सन के रूप में संबोधित करते हुए धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति बच्चों के अंदर शिक्षा के प्रति विश्वास पैदा करेगी तथा अपने मनपसंद विषय का चयन शिक्षा के अलग-अलग स्तर पर कर पाएंगे ।उन्होंने बताया कि आने वाले समय में शिक्षक बनने के लिए 3+1 इंटीग्रेटेड कोर्स बी. एड के साथ होगा जो सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य होगा। यानी शिक्षक बनने के लिए स्नातक की पढ़ाई के शुरुआती स्तर पर ही तय कर लेना होगा ।साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत बाल वाटिका से शुरुआत करने वाले बच्चों के लिए ईसीसी कार्यक्रम का शुरुआत किया जाएगा। जिसके लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षक व शिक्षिका ही उन्हें शिक्षित कर पाएंगे ।कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य महोदय अशोक कुमार सिंह ने शिक्षक व शिक्षिकाओं के मन में उठने वाले विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए ।उन्होंने शिक्षकों व शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस को रोना संक्रमण के दौर में भी हम शिक्षकों को अपने ज्ञान को हर स्तर पर अपग्रेड करते रहना चाहिए ।नई शिक्षा नीति आने वाले समय में भारत को एक सुदृढ़ व विकसित राष्ट्र बनाने में सफल होगा । कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षक व शिक्षिकाओं ने भी भाग लिया और अपने विचार भी रखें। कार्यक्रम की समाप्ति पर प्राचार्य महोदय ने सभी शिक्षक व शिक्षिकाओं से संकल्प करवाया की वे सदा अपने आप को अपग्रेड करते हुए शिक्षण रूपी यज्ञ में सदैव अपने ज्ञान और मेहनत की आहुति डालते रहेंगे ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास होता रहे।

 

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