निजी विद्यालयों को आरटीआई के दायरे से बाहर करे सरकार या मुहैया कराए विद्यालय निर्माण के लिए जमीन

निजी विद्यालयों को आरटीआई के दायरे से बाहर करे सरकार या मुहैया कराए विद्यालय निर्माण के लिए जमीन

निजी विद्यालयों को आरटीआई के दायरे से बाहर करे सरकार या मुहैया कराए विद्यालय निर्माण के लिए जमी

हेमंत सरकार का प्रदर्शन रघुवर सरकार से भी है खराब, नीति में सुधार नही हुआ तो करेंगे विरोध प्रदर्शन : मिथिलेश यादव

बरही लाइव : सोनु पंडित

बरही प्रखण्ड निजी विद्यालय संघ के अध्यक्ष मिथिलेश यादव ने प्रेस बयान जारी करते हुए बताया कि पारा शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, निजी विद्यालय के संचालक, शिक्षक सभी रघुवर सरकार के खिलाफ वोट कर उनको सही जगह पर भेजने का कार्य किया था, चूंकि सभी लोग कहीं न कहीं उक्त सरकार से परेशान थे।

जिसके कारण रघुवर सरकार को शिक्षकों का अंतर्विरोध ने ले डूबा। जिसके बाद हेमंत सोरेन को उम्मीद भरी नजरों से देख रहे थे।

लेकिन अब लगता है कि सभी लोगों ने भूल की है। कहा कि रघुवर दास तो सरकार रूपी गाड़ी को जैसे तैसे चला भी रहे थे, लेकिन हेमंत सोरेन ने तो गाड़ी खड़ी कर दी है। वह अपने उद्देश्य और एजेंडे भूल हीं गये हैं। न बिजली फ्री हुआ, न बेरोजगारी भत्ता मिल रहा है, न रोजगार, उल्टे रोजगार छीना जा रहा है।

छोटे छोटे निजी विद्यालय जो बहुत कम शुल्क में शिक्षा का अलख जगाने का काम कर रहे है, जहां गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के बच्चे पढ़ रहे हैं। सरकार ऐसे विद्यालयों को आरटीआई का हवाला देकर बंद करने पर तुली है। ऐसे विद्यालय के संचालकों को एक एकड से लेकर तीन एकड़ की भूमि में स्कूल चलाने के लिए कह रही है, जो इन छोटे छोटे संचालकों के लिए असंभव है।

ऐसी स्थिति में संचालक अपने विद्यालय को बंद करने पर मजबूर होंगे। इसका भारी दुष्परिणाम होगा। जैसे पहला गरीब व मध्यम वर्ग के बच्चे हमेशा के लिए सरकारी विद्यालयों में पढ़ने पर मजबूर होंगे। जहां पर खिंचडी, पोशाक और छात्रवृत्ति तो मिलती है लेकिन गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती हैं।

क्योंकि सरकारी विद्यालयों में एक तो शिक्षकों की कमी है, दूसरा वहां पढ़ाई हिंदी माध्यम से होती है और वर्तमान युग अंग्रेजी का है। निजी विद्यालयों से जुड़े सभी तरह के स्टाफ बेरोजगार हो जाएंगे। निजी विद्यालय पूरी तरह से पूंजीवादी लोगों के गिरफ्त में चले जाएगी, जहां केवल अमीरों के बच्चे हीं पढ़ पायेंगे।

आज बड़े बड़े संस्थानों जैसे डीएवी बड़े निजी विद्यालयों में पढ़ना गरीबों के बच्चों के लिए एक सपना मात्र है। इसलिए सरकार छोटे नीजि विद्यालयों पर आरटीआई लागू कर गरीब गुरबों पर जूल्म करने जा रही है।

सरकार अगर छोटे निजी विद्यालयों को श्रेष्ठ बनाना चाहती है तो उन्हें निःशुल्क ज़मीन मुहैया कराना चाहिए।बदले में क्यों न ऐसे विद्यालयों से जमीन का किराया वसूल करे। इससे सरकार को आमदनी भी होगी और गरीब गुरबों के बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित नहीं हों पाएंगे। साथ हीं ऐसे विद्यालयों से जुड़े लोग बेरोजगार नहीं होंगे।

फिर न तो सरकार ऐसे विद्यालयों को आरटीआई के दायरे से बाहर करें। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो हम सब सरकार के इस नीति का नैतिक रूप से विरोध करेंगे और समय आने पर इन्हें भी सबक सिखाने का कार्य करेंगे।

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