Jaswant Singh Death: 15 साल की उम्र में फौज में हुए थे शामिल, फिर पहुंचे राजनीति के शीर्ष पर

Jaswant Singh Death: 15 साल की उम्र में फौज में हुए थे शामिल, फिर पहुंचे राजनीति के शीर्ष पर

साल 2001 में जसवंत सिंह को सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान भी दिया गया. इसके बाद विभाजन को लेकर उन्होंने एक किताब लिखी.

Jaswant Singh Death: 15 साल की उम्र में फौज में हुए थे शामिल, फिर पहुंचे राजनीति के शीर्ष पर

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Jaswant Singh Dies: लंबे समय से बीमार चल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह (Jaswant Singh) का निधन हो गया है. वह 82 साल के थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने उनके निधन पर ट्वीट कर दुख जताया है. जसवंत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं. जसवंत सिंह भारत सरकार में कई वरिष्ठ पदों प रह चुके हैं. Also Read – लंबे समय से बीमार पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का निधन- PM मोदी ने जताया शोक

जसवंत सिंह का जन्म 3 जनवरी 1938 को हुआ था. यह एक कुशल राजनीतिज्ञ थे. अगर जसवंत सिंह के राजनैतिक सफर की बात करें तो वे 16 मई 1996 से 1 जून 1996 तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं. 5 दिसंबर 1998 से 1 जुलाई 2002 के दौरान वे वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री भी रह चुके हैं. सिंह फिर साल 2002 में वित्तमंत्री बनते हैं और 2004 तक वे अपने पद पर कायम रहते हैं. बता दें जसवंत सिन्हा 15वीं लोकसभा में दार्जिलिंग से सांसद चुने गए थे.

वैसे जसवंत सिंह राजस्थान के बाड़मेर जिले के रहने वाले हैं, इन्होंने 15 साल तक अपने सेवा भारतीय सेना में दी. वे 15 साल की उम्र में भारतीय सेना में शामिल हुए थे. जसवंत सिंह जोधपुर के पूर्व महाराजा गज सिंह के बेहद करीबी भी माने जाते थे. साल 2001 में जसवंत सिंह को सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान भी दिया गया. इसके बाद विभाजन को लेकर उन्होंने एक किताब लिखी. इस किताब में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल की आलोचना की और मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ की, इस कारण उन्हें भाजपा ने पार्टी ने निष्काषित कर दिया. हालांकि कुछ समय बाद पुन: जसवंत सिंह को भाजपा में शामिल कर लिया गया.

साल 2014 में जसवंत सिंह लोकसभा चुनाव में जैसलमेर-बाड़मेर लोकसभा सीट से टिकट चाहते थे. लेकिन ऐसा नहीं किए जाने पर उन्होंने भाजपा का दामन छोड़ दिया और निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. बता दें कि जसवंत सिंह को उनकी इस गलती के लिए भाजपा से 6 साल तक के लिए निष्काषित कर दिया गया.

बता दें कि जसवंत सिंह भारतीय राजनीति के उन थोड़े से राजनीतिज्ञों में से हैं जिन्हें भारत के रक्षा मंत्री, वित्तमंत्री और विदेशमंत्री बनने का अवसर मिल चुका है। वे वाजपेयी सरकार में भारत के विदेश मंत्री बने, बाद में यशवंत सिन्हा की जगह उन्हें वित्तमंत्री बनाया गया। बता दें कि इनकी मौत के बाद कई राजनेताओं ने इन्हें श्रद्धांजलि दी है

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