वर्षा ऋतु खत्म होने को है और बराकर नदी का कंठ है सूखा

वर्षा ऋतु खत्म होने को है और बराकर नदी का कंठ है सूखा

2018 जुलाई माह में तीव्र गति से बढ़ रही थी बराकर नदी का जल स्तर

Barhi Live : Harendra Rana

हजारीबाग जिले के दो बड़े प्रखंड चौपारण-बरही को बांटने वाली बराकर नदी का भादो माह में भी कंठ सूखा पड़ा है। बता दे कि बरही और चौपारण प्रखंड में बारिस नही होने से एक तरफ किसान धान की खेती नही कर पाए है। वही दूसरी तरफ इस वर्ष जुलाई, अगस्त और सितंबर माह में बारिस नही होने से खेत खलिहान के साथ-साथ नदी नाला खुली आसमान को पानी बरसाने के लिए निहार रहा है।
       मालूम हो कि इस वर्ष 2019 से पहले हर वर्ष जुलाई-अगस्त माह में जम कर बारिस होने से बराकर नदी में पानी उफान पर रहा करता था। ज्ञात हो कि बराकर नदी में चौपारण, बरही, चंदवारा प्रखंड के साथ-साथ चतरा जिले के कई प्रखंडों के छोटे-बड़े नदी-नालों का पानी बराकर नदी से होते हुए तिलैया डैम में एकत्रित होकर डीवीसी द्वारा विस्थापित 56 मौजा का जमीन को जलमग्न कर दिया करता था।
      इस वर्ष बारिस नही होने सेे बच्छई, ओबरा, चक, मलिकाना, सेवई, गोबिन्दपुर, लराही, गोरखवा, भटविगहा, टोइया, हजारी, हजारीधमना, करमाटांड, ढाब सलोनिया, डुमरी, लेंढिया, सिरमा सहित दर्जनों गांव के किसान खेती नही कर पाए।
              विश्वकर्मा समाज अध्यक्ष मिथिलेश्वर प्रसाद राणा, पूर्व सरपंच अर्जुन सिंह, देवल यादव, मुखिया कुंती देवी, अंजू देवी, बबिता देवी, नूतन सिन्हा, ललिता देवी, उपमुखिया गिरजा देवी, मुखिया प्रतिनिधि बीरेंद्र रजक, मुखिया प्रतिनिधि सुरेश साव, जिप प्रतिनिधि बीरेंद्र भुइयां, संतोष पांडेय सहित कई लोगों ने कहा कि नदी-नाला, कुआं-तालाब नही भरने से 6-7 माह बाद गर्मी का मौसम आने पर पानी के एक-एक बूंद के लिए
जदो जहद करना पड़ेगा। जनप्रतिनिधियो ने प्रखंड प्रशासन, जिला प्रशासन के साथ-साथ सरकार से मांग किया है कि चौपारण को सुखाड़ घोषित किया जाय।

You may also like

कार्यकर्ता प्रखंड में समन्वय बनाकर चुनाव की तैयारी करें : मनोज

प्रखंडस्तरीय बूथ समिति व कार्यकर्ता सम्मेलन में उमड़े