चौपारण के जंगलों में चल रही शराब की मिनी फैक्ट्री ध्वस्त

चौपारण के जंगलों में चल रही शराब की मिनी फैक्ट्री ध्वस्त

Barhi live : हरेंद्र राणा 

चौपारण प्रखंड के भगहर, परसातरी, अंबातरी, जीरवा, महुआतर, मरघट्टी सहित जंगली क्षेत्र के गांवों में अवैध शराब की मिनी फैक्ट्री चलाई जा रही थी। उत्पाद विभाग ने इन स्थानों पर छापेमारी कर करीब 250 अवैध शराब की भट्ठी नष्ट की है। यहां से विभाग द्वारा 33 हजार किलो जावा महुआ, 12 सौ लीटर देसी शराब सहित अन्य शराब बनाने के उपकरण, महुआ तथा शराब बनाने की सामग्री बरामद की गई है।

चौपारण पुलिस के सहयोग से गुरुवार को चलाए गए विशेष छापेमारी में अवैध शराब की भट्ठी तथा पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए जमीन में दबा कर रखे गए ड्राम को नष्ट करने के लिए जेसीबी का उपयोग करना पड़ा। गुरुवार को जेसीबी की मदद से करीब 70 पुलिस व अधिकारियों के टीम ने 15 सौ ड्राम नष्ट किए। उत्पाद की छापेमारी अभियान चौपारण पुलिस की सहयोग से सुबह पांच बजे प्रारंभ हुई और संध्या पांच बजे समाप्त हुई।पुख्ता सूचना के आधार पर जंगलों में पहुंची टीम ने एक-एक भट्ठी को नेस्तानाबूद कर दिया। छापेमारी दल का नेतृत्व सब इंस्पेक्टर रनजीश कुमार, राजीव नयन कर रहे थे।

12 पर दर्ज की गई प्राथमिकी, दो माह में चौथा अभियान

चौपारण के जंगलों में दो माह में उत्पाद विभाग की यह चौथा अभियान था। गुरुवार को 12 लोगों की पहचान कर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस को आता देख कारोबारी जंगल में फरार हो गए। नदी और तालाब किनारे घने जंगलों में बने ये शराब के कारखाने से निकलने वाला शराब बिहार भेजी जाती है। बिहार में शराब बंदी के बाद अवैध शराब के कारोबार में दस गुणा तेजी आई है।

अवैध कारोबारियों को करीब 20 लाख से अधिक का हुआ होगा नुकसान : सहायक आयुक्त

सहायक आयुक्त ने कहा कि उत्पाद विभाग छापेमारी अभियान भी चलाती है। कम संसाधन के बावजूद लगातार चौपारण जैसे दुरुह क्षेत्रों में भी चलाया जा रहा है। गुरुवार को हुए इस अभियान में अवैध कारोबारियों को करीब 20 लाख क्षति उत्पाद विभाग ने दी है। विभाग का सीधा सोच अवैध कारोबारियों की कमर तोड़ उन्हें जेल में डाल देना है। विभाग हर छोटी से छोटी सूचना पर भी पुख्ता कार्रवाई कर रही है। कोई भी मेरे नंबर या कार्यालय में आकर इसकी जानकारी दे सकता है।

अबतक अकेले अगस्त माह में 35 से अधिक लोगों को जेल भेजा जा चुका है।
बताते चले कि अवैध शराब भट्टी तोड़ कर उत्पाद विभाग के अधिकारी और जवान जैसे ही वापस लौटते है। उसके बाद से ही अवैध शराब बनाने वाला फैक्ट्री का निर्माण कार्य शुरू कर देते है।

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