कोविड १९ महामारी दौरान थैलासीमिया रोगियों की जान को खतरा।

कोविड १९ महामारी दौरान थैलासीमिया रोगियों की जान को खतरा।

आज क्रोनोवाइरस (कोविड १९) महामारी विश्व भर में एक बहुत बड़ी समस्या बन गयी है । अब तक दुनिया में १२,५०,००० से अधिक और भारत में ४००० से अधिक व्यक्ति इस वाइरस से प्रभावित हो चुके है। विश्व में ६७,००० से अधिक रोगी इससे अपनी जान गवां चुके हैं।

जहां एक ओर कोविड १९ का संक्रमण अस्थमा, मधुमेह, ह्रदय रोग, डायलिसिस पर निर्भर रोगी तथा कैंसर आदि के लिए अधिक घातक हैं वहां थैलासीमिया रोगियों के लिए एक विशेष प्रकार की समस्या बन गयी है।
थैलासीमिया रोगी को हर १५ – २० दिन में खून चढ़ाना पड़ता है । यदि समय पर खून नहीं मिलता है तो अनिमिआ बढ़ जाता है जिससे इन्फेक्शन होने का खतरा बहुत अधिक हो जाता है ।

थैलासीमिया रोगियों में अक्सर मधुमेह, ह्रदय रोग, जिगर रोग एवं अंतःस्रावी ग्रंथियों में समस्याएं पायी जाती हैं। अतः इनमे यदि कोविड १९ का संक्रमण हो जाये तो परिस्थितयां और भी गंभीर हो सकती हैं। जिन बच्चों में तिल्ली का ऑपरेशन हो रखा हैं उनमे तो समस्या और भी अधिक विकट हैं।

आजकल कोविड १९ महामारी के चलते रक्त दान शिविर नहीं लग रहें हैं, स्वेच्छिक रक्तदाता कोविड १९ के संक्रमण के डर से अस्पताल में रक्तदान करने से घबरा रहे हैं। जो थोड़े बहुत रक्तदान करना भी चाहते हैं वो भी वाहन का आभाव व् कर्फ्यू पास प्राप्त करने आयी कठिनाईयों के कारण रक्तदान करने में असुविधा महसूस कर रहे हैं। यदि समय रहते इस पर प्रभावी कदम नहीं उठाये गए तो थैलासीमिया बच्चों का जीवन खतरे में पड़ सकता हैं।

दूसरी बड़ी समस्या जो थैलासीमिया रोगिओं को आ रही हैं वह है दवाई का न मिलना। थैलासीमिया रोगियों में बार बार खून चढ़ाने से शरीर में अतिरिक्त लोहा जमा हो जाता है। जिसको निकालना अति आवश्यक है। अतिरिक्त जमा हुए लोहे को निकालने के लिए जो दवा रोज खानी पड़ती है वह साधारण दवा की दुकान या इ फार्मेसी से नहीं मिलती। ये दवाईयां या तो अस्पताल से मिलती है या थैलासीमिया संस्था से मिलती है। दिल्ली में तो रोगी हमसे आकर ले जाते है परन्तु कूरियर वस्वस्था बंद होने के कारण अन्य राज्यों में दवा की बहुत कमी देखी गयी है। यदि समय पर दवा न मिले तो ह्रदय में लोहा जमा होने पर मृत्यु भी हो सकती है।

तीसरी गंभीर समस्या है जहाँ पति-पत्नी दोनों थैलासीमिया कैरियर हैं और ३ महीने की गर्भावस्था है। भ्रूण की जाँच पूरे भारत में ५-६ शहरों में ही होती है। वाहनों की आवाजाही बंद होने के कारण वह गर्भवती महिला भ्रूण की जाँच नहीं करा पा रही है। यदि आने वाला बच्चा थैलासीमिया रोग से प्रभावित हुआ तो उस परिवार व समाज पर अनावश्यक बोझ होगा।
मेरी सरकार से विनती है कि सिमित रक्तदान शिविर लगाने की अनुमति दी जाए जहाँ १-२ रक्तदानी को अंतराल में बुलाकर उचित दूरी, हस्त एवं श्वसन स्वच्छता का ध्यान रखते हुए २०-२५ व्यक्ति स्वेच्छा से रक्तदान कर सकें। हर जिले में दवा का प्रबंध व गर्भवती महिला को भ्रूण जाँच कि लिए अन्य शहर में भेजने की व्यवस्था की जाये।

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