‘बिना किसी खर्चा के’ और ‘बिना किसी पर्चा के’ युवा अधिवक्ता इंद्र कुमार ने जीता चुनाव !

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Advocate Indra Kumar Pandit
Advocate Indra Kumar Pandit

हजारीबाग से सुभाष सिंह की रिपोर्ट: जिला बार एसोसिएशन में सबसे युवा, संघर्षशील और चर्चित चेहरा अधिवक्ता इंद्र कुमार पंडित के कार्यकारिणी सदस्य के पद पर चुनावी जीत चर्चा का विषय बन गया हैं।

ग्रामीण पृष्ठ भूमि से है नाता

युवा अधिवक्ता इंद्र कुमार पंडित हजारीबाग जिला के अंतर्गत केरेडारी प्रखंड के अति पिछड़ा इलाका बेंगवरी गांव के रहने वाले हैं। इनकी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा गांव के ही विद्यालय फागु साव मेमोरियल उच्च विद्यालय बेंगवरी से हुई है।

यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज से की है कानून की पढ़ाई

संत रॉबर्ट इंटर कॉलेज हजारीबाग से इंटर विज्ञान से करने के बाद यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज से 2015 में बीए.एल.एल.बी की पढ़ाई पास किए थे की उसी दौरान अचानक इनके उपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा और मां को कैंसर की बीमारी होने के कारण बनारस में इलाज के दौरान 2015 में मृत्यु हो गई।

 इलाहाबाद में रहकर किया जुडिशरी की तैयारी

 फिर भी इन्होंने अपने हौसले को बुलंद करते हुए जुडिशरी की तैयारी के लिए इलाहाबाद गए थे, किंतु आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण 2016 में हजारीबाग वापस आ गए और हजारीबाग सिविल कोर्ट में वकालत  शुरू कर दिए।

पिता हुए राजनीतिक षड्यंत्र के शिकार

सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि अचानक 2019 में फिर से इनके ऊपर एक और पहाड़ जैसी घटनाएं घट गई और अचानक इनके पिता स्वर्गीय गोविंद प्रजापति जो एक वरिष्ठ समाजसेवी थे, वे भी राजनीतिक षड्यंत्र के शिकार हो गए और अज्ञात लोगों के द्वारा कटकमसांडी में उनका भी निर्मम हत्या कर दिया गया।

संघर्षों का दौर लगातार चलता रहा

जिससे इनका जीवन लगातार कठिनाइयों के दौर से गुजरता रहा फिर भी इन्होंने कभी पीछे मुड़कर देखा नहीं और संघर्षों का दौर लगातार चलता रहा इसके बावजूद भी इनके हौसले और बुलंदियों को दाद देनी पड़ेगी, क्योंकि इन्होंने पूरी ईमानदारी से कठिन संघर्ष करते हुए अपनी कुशल व्यवहार के कारण समाज और हजारीबाग बार एसोसिएशन में अधिवक्ताओं के बीच जो पहचान बनाकर दिल जीतने का काम किए वह इनके लिए एक मिसाल है।

बिना किसी पर्चा के जीता चुनाव

 दिलचस्प बात यह है कि जब हजारीबाग बार एसोसिएशन में ये कार्यकारिणी सदस्य के पद पर चुनाव लड़ रहे थे तो इन्होंने प्रचार-प्रसार के लिए किसी तरह की न कोई खर्चा किया और न कोई पर्चा बांटा था।

“बिना किसी खर्चा के” और “बिना किसी पर्चा के” ही अपनी लगन, मेहनत, ईमानदारी और कुशल व्यवहार से ही हजारीबाग बार एसोसिएशन में बहुत कम उम्र में और बहुत ही कम समय में पूरे बार में चर्चा का विषय बने हुए थे।

इनके कठिन परिश्रम के साथ-साथ यही लगन, ईमानदारी और कुशल व्यवहार ही हजारीबाग बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य के पद पर इनके जीत का मुख्य कारण बना।

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