मुहर्रम पर्व शांति व सौहार्द के साथ हुआ सम्पन्न

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इमाम हुसैन के शहादत को गमगीन आंसू से दी गई विदाई

सामाजिक समरसता का उदाहरण हैं बरही, मुस्लिम धर्मावलंबियों के साथ-साथ हिन्दू भाई भी उठाते हैं ताजियां

Barhi live : Sonu pandit मुहर्रम पर्व बरही में शांति व सौहार्द के साथ सम्पन्न हुआ। आज के दिन ही हजरत हुसैन शहीद हुए थे। उनके शहीद की याद में मुहर्रम पर्व मनाया जाता है। हजरत हुसैन शहीद होकर यजीद के नपाक इरादे को बर्बाद कर दिया था और इंसानियत के परचम को ऊँचा रखा था।

हजरत हुसैन की शहादत को गमगीन याद में लोगो ने आंसू भरे विदाई दिया, साथ ही उनके कष्ट भरे जीवन को अपने मूलरूप में अनुभव करते हुए और इमाम के घोड़े के रूप में पैकवाहा बनकर सारे नगर में बने इमाम के चौके में झूमते नजर आयें।

हजरत इमाम हुसैन की शहादत के अवसर बरही प्रखंड के विभिन्न पंचायतो में शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया गया। कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए कई जगहों पर ताजिया उठाये गए और मुहल्ले में घुमाकर पुनः वापस लौटे।

इस अवसर पर इमाम हुसैन, या अली के नारे की धूम रही। दसवीं के दिन क्लब के सारे ताजिया गांव मुहल्ला के चारो तरफ घूमकर आकर्षक प्रदर्शन किया। इस पर्व को मुस्लिम हिन्दू मिलकर बड़ी सौहार्द के साथ मानये। जिसको देखकर लोंगो को लगा कि बरही में हिन्दू व मुस्लिम के बीच एकता एक मिसाल है।

हालांकि बरही प्रशासन द्वारा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया था। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि मो क्यूम ने इमामे हुसैन कि शहादत कुर्बानी पर लोग के सामने जिक्र किया। कहा कि इमामे हुसैन ने इंसानियत के लिए एवं दीन को बचाने के लिए हस्ते हुए अपना सर कटवा लिया लेकिन अजीद के सामने झुके नहीं तत्पश्चात खुद अपने से ताजिया को उठाकर करबला पहुंचाया।

कुछ लाठी का प्रदर्शन भी कर दिखाया। इस अवसर पर जीप प्रतिनिधि मो क्यूम, बासुदेव यादव, मुखिया दसरथ यादव, मुखिया दुखन पासवान, पंचायत समिति देवलाल कुशवाहा, अर्जुन दास, सुखदेव यादव, मो मंसूर, मो सलामत, रमजान अंसारी, महताब आलम, मंसूर अंसारी, मो मेराज अंसारी, गगन निषाद, सतीष निषाद, रवि निषाद, गणेश निषाद, शफी अहमद, सद्दाम खान, असगर खान, इनामुल अंसारी, सदाम अंसरी, सेराज अंसारी, एकबाल अंसारी, फैयाज सिद्दीकी, गुड्डू सिद्दीकी सहित अन्य लोग शामिल थे। बताते चलें कि गांगुली निषाद, हरि निषाद, मुकेश निषाद, चन्द्र निषाद, मोती निषाद, उदय निषाद, राजू निषाद, अनन्त पासवान भी मल्लाहटोली में तजियां उठाकर सामाजिक समरसता का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

वें लोग लगभग कई वर्षों से तजियां उठा रहे हैं। वे लोगों का मानना हैं कि मल्लाह टोली में हिन्दू-मुस्लिम भाई आपस में मिलकर गंगा-जमुना के तहजीब को प्रस्तुत करते हैं। न केवल मुसलमान, बल्कि बड़ी तादात में हिंदू भी इमाम के रोजे की ताजिया बनाते हैं।गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश कर बरही के इलाकों में कई हिंदू घरों में ताजिया बनाने का काम होता है।

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