मथुरा में 6 दशक बाद फिर उठा कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मस्जिद का विवाद, 30 सितंबर को सुनवाई

मथुरा में 6 दशक बाद फिर उठा कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मस्जिद का विवाद, 30 सितंबर को सुनवाई

Mathura News: विपक्ष का कहना है कि कोर्ट ने 1973 के अपने फैसले में मंदिर और ईदगाह दोनों के ढांचे में किसी तरह का बदलाव करने पर रोक लगाई गई है। ऐसे में इस तरह की अर्जी दायर करने के पीछे राजनीतिक मंशा है।

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नई दिल्ली : श्री कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद मामले में हिंदू पक्ष की ओर से दायर अर्जी सुनवाई करने के योग्य है या नहीं इस पर मथुरा की सिविल अदालत 30 सितंबर को सुनवाई करेगी। श्री कृष्ण श्रद्धालुओं ने अपनी अर्जी में भगवान कृष्ण के जन्मस्थान के समीप स्थित 17वीं सदी के शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की है। इस अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए मथुरा के सिविल जज ने कहा कि अदालत 30 सितंबर को इस बात को देखेगी कि यह अर्जी सुनवाई करने योग्य है या नहीं।

पूजा की जगहों पर यथास्थिति में बदलाव की इजाजत नहीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ऐसा लगता है कि कोर्ट में यह विवाद आसानी से खत्म नहीं होने वाला है। कृष्ण श्रद्धालुओं की दलील है कि मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण किया गया है। अर्जी में कहा गया है कि हिंदू श्रद्धालुओं के साथ गलत समझौता हुआ है और इसे समझौते को सुधारने की जरूरत है। बता दें कि 1991 का कानून पूजा की जगहों की यथास्थिति में बदलाव करने की इजाजत नहीं देता है।

विपक्ष का कहना है अर्जी दायर करने के पीछे राजनीतिक मंशा
विपक्ष का कहना है कि कोर्ट ने 1973 के अपने फैसले में मंदिर और ईदगाह दोनों के ढांचे में किसी तरह का बदलाव करने पर रोक लगाई गई है। ऐसे में इस तरह की अर्जी दायर करने के पीछे राजनीतिक मंशा है। इसके जरिए हिंदू-मुसलमानों के बीच सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने अयोध्या फैसले में साफ कहा है कि पूजा स्थलों के विवाद को लेकर दायर होने वाली अर्जियों पर देश का कोई कोर्ट सुनवाई नहीं करेगा।

छह दशक पुराना है यह विवाद
मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और ईदगाह मस्जिद का विवाद छह दशक पुराना है। साल 1944 में कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि खरीदी गई। वर्ष 1958 में श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ बनाया गया। इसके बाद 1967 में सेवा संघ ने केस दायर कर मंदिर परिसर पर अपने अधिकार का दावा किया। शुक्रवार को सिविल जज छाया शर्मा की कोर्ट में दायर अर्जी में 1968 के मथुरा की एक अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। इसमें श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदबाग प्रबंध समिति के बीच हुए एक भूमि समझौते में सुधार करने की मांग की गई है। इस अर्जी पर सुनवाई के लिए कोर्ट यदि तैयार हो जाता है तो सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड, शाही ईदगाह मस्जिद और मस्जिद की देखभाल करने वाले ट्रस्ट को नोटिस जारी होगा।

जिले में बिजली परियोजना विकास की निगरानी करने मथुरा पहुंचे बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा था कि सभी को अधिकार है कि वह अपनी आस्था चुने और सभी को अपनी बात रखने की आजादी है। विपक्ष का कहना है कि इस अर्जी के जरिए भारतीय जनता पार्टी हिंदुओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है।

 

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